एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का अभी कुछ दिनों पहले मौसम की आशिकी का शिकार हुए हम। मतलब सूरज का कम्प्लीटली किडनैप हो गया। घुमड़ - घुमड़ बदल गरजे.....मस्तानी सी हवा बह चली .... बारिश जैसा माहौल बना लेकिन बूंदों को बादल ही गटक गया....दो-चार गिरी....और बावरी धरती को धोखा हो गया....धरती भीगी... [पूरी पोस्ट]
writer Priya

आंधी जैसा कुछ

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[16 May 2010 06:57 AM]

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