मैत्री पर एक टीप और विवाद जो नहीं था
वह कोई विवाद नहीं था. दो मित्रों पर सखा-भाव से की गईं टिप्पणियां थीं . वह भी उनके गुणों को पर्याप्त मान देते हुए. टिप्पणियां भी उन मित्रों पर जो न केवल पिछले कई वर्षों से ब्लॉग पर एक-दूसरे के लिखे को समुचित मान-सम्मान देते रहे वरन...
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chaupatswami
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[16 May 2010 02:15 AM]



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