शातिर की थेंथरई - कविता - प्रिय कवि विष्‍णु नागर को पढते हुए - कुमार मुकुल

कारवाँ नागर जी का कविता संग्रह घर के बाहर घर अंतिका प्रकाशन से आया है इस साल। पडोसी कव‍ि,पत्रकार मित्र पंकज चौधरी से लेकर पिछले सप्‍ताह यह संग्रह पढा मैंने। पिछले संकलन की तरह व्‍यौरों की बारीकी और व्‍यंग्‍य की धार इस संग्रह की कविताओं की भी खासियत है। कई... [पूरी पोस्ट]
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[16 May 2010 05:20 AM]

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