***हर शय में था***
प्रस्तुत पंक्तियों की प्रेरणा किसी को हुक्का पीते देख कर मिली....हुक्के को पीते समय जो आवाज़ आती है ऐसा लगता है-----णाम..फिर जब ठहर जाते हैं तो आवाज़ कुछ ऐसी होती है ---णानक...और जब छोड़ते हैं तो........हू.मंदिर, मस्जिद,गुरुद्वारारही ढूँढती मैं हर सूँछिपा...
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Jyotsna Pandey
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[16 May 2010 04:23 AM]



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