मीडिया का दायरा बढा नहीं घटा है

इन दिनों ........... राजस्‍थानी के प्रसिद्ध कवि बुद्धिप्रकाश पारीक नहीं रहे। राजस्‍थानी में ढूंढ़ाड़ी बोली के प्रबल हस्‍ताक्षर थे पारीकजी। उनका जाना एक बड़ी क्षति है। मन विचलित है, सबसे बड़ा विचलन उनके चुपचाप चले जाने के कारण है।मेरा यहां अर्थ अखबारों की स्‍थानीयता से है। यह... [पूरी पोस्ट]
writer दुलाराम सहारण
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[16 May 2010 03:56 AM]

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