तब हुई कोई कविता
विरही के यादों के मौसम मेंरिमझिम बरसते सावन मेंदो बूँद मिली हो अश्रु कीऐसा संगम जब-जब हुआतब हुई कोई कविताहिरण-से इस चंचल मन नेस्मृति वन में दौड़ लगाईकहीं ठहर दो लम्हे काटेऐसी जब कोई ठौर मिलीतब हुई कोई कवितातनहाई के सूने क्षण मेंबेचैन के दर्द भरे आलम...
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डॉ. राजेश नीरव
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[16 May 2010 00:41 AM]



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