बुधवा मुंडा को नींद नहीं आती - अच्युतानंद मिश्र

कारवाँ बुधवा मुंडा को नींद नहीं आती रात भर कोईउसके सपनो में कहता है उलगुलान उलगुलान उलगुलान ! के है रे खाट पर लेटा बुधवाइंतज़ार करता है उसका पठारी मन पूछता है जाने कब होगा विहान जाने कब निकलेगा ललका सूरज जाने कब ढलेगी ये अँधेरी रात और फैलने लगती है चुप्पी जंगल... [पूरी पोस्ट]
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[16 May 2010 00:18 AM]

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