“खरबूजे का मौसम आया” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

नन्हें सुमन पिकनिक करने का मन आया! मोटर में सबको बैठाया!! पहुँच गये जब नदी किनारे! खरबूजे के खेत निहारे!! ककड़ी, खीरा और तरबूजे! कच्चे-पक्के थे खरबूजे!! प्राची, किट्टू और प्रांजल! करते थे जंगल में मंगल!! लो मैं पेटी में भर लाया! खरबूजों का मौसम आया!!  देख पेड़... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[16 May 2010 00:21 AM]

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