क्रांति का बिगुल
क्रांति का बिगुलहम गीत प्यार के गाते हैंक्रांति का बिगुल बजाते हैंहम परिवर्तन के अग्रदूतपानी में आग लगाते हैंजब जब धरती का मान गिराऔर बेबस का सम्मान गिरामर्यादा का चीर के दामनजब भूखे का इमान गिरातभी शब्द का तरकश लेकर सत्ता से टकराते हैंधर्म बना मानव का...
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Dr M.S. Parihar
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[15 May 2010 23:01 PM]



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