क्रांति - बरगद बना गुलाब
बरगद का विराट वृक्षअपने विस्तार को समझ रहा हैहवा के टकराव से उभरते आन्दोलनों को देख रहा हैपत्ते पत्ते को देखता परखताअपनी ही शाखाओं और टहनियों से गुजरतालौट जाता है अपने ही बीज में जहाँ से चला थातो अचानक क्रांति घटी -बीज टूटातिनके तिनके बिखर गये औरइसी...
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Arun Khadilkar
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[15 May 2010 21:12 PM]



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