आकाशवानी

आकाशवानी ाहुत दिनों बाद आज कुछ लिखता हॅूसेचता हॅू मैं क्या कुछ लिखता हॅूसुबह समेटता हॅू लब्जों में दिन का निकलनापूरे दिन का हाल हर शाम कुछ लिखता हॅू कब घिर आती है रात ओढे ठंड की चादरयही सोचते सोचते हर बार कुछ लिखता हॅूफिर आयेगी सुबह थामे उम्मीद का दामनइस उम्मीद... [पूरी पोस्ट]
writer आकाशवानी
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[20 Apr 2010 15:13 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix