मुझे गर्व है की मैं भिखारी हूँ, कोई नेता या अफसर नहीं (कविता)
मैं मंदिर की सीढ़ी पर बैठा एक भिखारी,जिसे दुत्कारती ये दुनिया सारी, हर बन्दे में ईश्वर को मानता हूँ, आज खुदा से ये जवाब मांगता हूँ।सुना है तेरा घर है बड़ा सा तू यही रहता है,ये मैं भिखारी नहीं सारा जमाना कहता है,मेरा मैला कमजोर शरीर भी धूप सहता है,इन नीली...
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राजेन्द्र मीणा
जीवन-दर्शन
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[15 May 2010 15:38 PM]



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