मेरा "मैं" और हमारा "सफर" - वीनस केशरी
मेरा “मैं” मुझ जैसे कितने ही “मै” के साथ मिला हुआ था,, और सब मिल कर “बादल” थे, किसी के पास अपना “मैं” नहीं था,,,,, और जब बारिश हुई तो सब अपना अपना हिस्सा ले कर अलग हो गये, जब बारिश हुई तो मुझे पता चला मै, “मै” हूँ | ना जाने सब कहाँ गये, किसने क्या...
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वीनस केशरी
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[15 May 2010 15:07 PM]



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