साहित्य सुबीर सीहोर ...
गुरु जी के साथ सच कहूँ तो आजकल ठीक से नींद नहीं आती , पता नहीं किस ख़ाब को हक़ीकत होते देख लिया है मैंने ! हाँ सच ही तो है और ये बात है उस जगह की जहां साहित्य की सरिता बहती है, जिसे मैं सीहोर कहता हूँ ! ८ तारीख मेरे जीवन का सबसे हसीन या स्वर्णिम क्षण कह...
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"अर्श"
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[15 May 2010 13:30 PM]



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