रिश्तों और मानवता को शर्मसार करती अमानवीय क्रूरता
एकलव्य अपहरण एवं हत्याकाण्ड़ :-(मुस्कान चतुर्वेदी)ईर्ष्या, आपसी द्वेष इंसान को दरिंदगी की उस पराकाष्ठा पर ले जाती है, जहां उसके सोचने-समझने की शक्ति खत्महो जाती है, जब न तो उसे खून के रिश्ते नजर आते हैं, न मानवता नजर आती है और न ही उसके लिये मासूमियतकोई...
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[15 May 2010 11:01 AM]



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