कविता दुनियां है बड़ी

BAL SAJAG दुनियाँ है बड़ीदेखों क्या है ए दुनियाँ ,सब कोई मनमानी करते दुनियाँ में....सब कोई रहते दुनियाँ में,दुनियाँ में से कोई चले जाते हैं....दुनियाँ का नाम लेकर रह जाते हैं,दुनियाँ हैं देखो कितनी बड़ी....आदिमानव ने नहीं पहनी कभी घड़ी,दोखो क्या हैं ए दुनियाँ... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[15 May 2010 11:57 AM]

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