एक ग़ज़ल : यहाँ लोगों की आँखों में .....
ग़ज़ल : यहाँ लोगों की आँखों में....... यहाँ लोगों की आँखों में नमी मालूम होती है नदी इक दर्द की जैसे थमी मालूम होती है हज़ारों मर्तबा दिल खोल कर बातें कही अपनी मगर हर बार बातों में कमी मालूम होती है चलो रिश्ते पुराने फिर से अपने गर्म कर आएं दुबारा बर्फ की...
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आनन्द पाठक
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[15 May 2010 10:06 AM]



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