आदरणीय श्री भैरों सिंह जी को अश्रुपूरित श्रधांजलि
शेखा-कुल रा लाडला,धाकड़ धुनी सुजान |उजला सूरज-कुल-रतन,भैरूं सिंघ मतिमान ||१मरुधर-माटी री महक,जन-मन का सरदार |दीन-हीन-रक्षक सुधी,थे भारत-गल-हार ||२भोग्यो जीवन गांव रो,देख्या घणा अभाव |पण सांचा अनथक पथिक,राख्यो कर्मठ भाव ||३राष्ट्र धरम ने पालियो,जस फैल्यो...
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Ratan Singh Shekhawat
pratikriya
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[15 May 2010 10:17 AM]



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