“सूखे हुए छुहारे, उनको लुभा गये हैं” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
“प्रियवर अलबेला खत्री जी को समर्पित” अंगूर के सभी गुण, किशमिश में आ गये हैं! सूखे हुए छुहारे, उनको लुभा गये हैं!! बूढ़े हुए तो क्या है, मन में भरा है यौवन, गीतों के जाम में ही, ढाला हुआ है जीवन, इस उम्र में भी हम तो, दुनिया को भा गये हैं! सूखे हुए...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[15 May 2010 09:18 AM]



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