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मनोज आज बाजारवाद शवाब पर है। हर तरफ़। किस तरह से अपने उत्पाद को सर्वश्रेष्‍ठ घोषित कर उसकी मार्केटिंग की जाए, यह भी एक कला है। जो इस कला में निपुण है उनकी तो बल्‍ले-बल्‍ले! वरना कई ऐसे उत्पाद हैं जो गुणवत्ता में किसी से कम न होते हुए भी प्रचार/मार्केटिंग के... [पूरी पोस्ट]
writer मनोज कुमार

कविता

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[15 May 2010 09:00 AM]

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