बोलिए....ये हमारे सरोकार हैं ..........

dukhwa kase kahun? कितना पानी ढोलते है,मकान मालिक को तो पता ही नहीं,रोज़ रोज़ पाइप लगा कर नहाते है ,किससे कहे ,कैसे कहे? ये रोज़ ही महिला मंडली की चर्चा का विषय होता था.नयी बसी कालोनी में नित नए मकान बनते थे,जहा सामान की रखवाली के लिए चौकीदार होते थे,उन्हें टूबवेल चलने की... [पूरी पोस्ट]
writer kase kahun?by kavita.
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[15 May 2010 06:49 AM]

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