दिल-ए-नादाँ
अनिल गोयल भोपाल में रहते हैं। मां पर लिखी गई उनकी कविताएं दिल को छू लेने वाली हैं। उसी चौखट से उनके कविता संग्रह का नाम है। उन्होंने इस बार एक अभिनव प्रयोग किया है संग्रह की प्रत्येक कविता के साथ इंटरनेट से डाउनलोड की गई कोई तस्वीर चस्पा है जाहिर है...
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संदीप पाण्डेय
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[15 May 2010 05:46 AM]



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