बचपन

bharat hi meri jan वो भी क्या दिन थे हमारे , रेत में क्रीडा किया करते थे नदियों में नहाते थे  , भैंस को पानी पिलाते फिर जोहड़ में चले जाते बैट बोल खलते तो सर फोड़ दिया करते थे , कभी ख़ुद का फूटता तो रो दिया करते थे घंटो पहाडो की चोटियों... [पूरी पोस्ट]
writer vikas mehta
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[15 May 2010 05:39 AM]

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