चाहिए मुझे मेरा असंग बबूलपन

मुक्तिबोध मुझे नहीं मालूममेरी प्रतिक्रियाएँसही हैं या ग़लत हैं या और कुछसच, हूँ मात्र मैं निवेदन-सौन्दर्यसुबह से शाम तकमन में हीआड़ी-टेढ़ी लकीरों से करता हूँअपनी ही काटपीटग़लत के ख़िलाफ़ नित सही की तलाश में किइतना उलझ जाता हूँ किजहर नहींलिखने की स्याही में पीता... [पूरी पोस्ट]
writer Rangnath Singh

मेरा असंग बबूलपन

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[15 May 2010 03:27 AM]

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