सज़ा नहीं सुविधा
जो मरने के लिये ही आया है उसे मौत की सज़ा सुनाकर हम कौन सा तीर मार लेंगे. वो तो ग़नीमत है कि कसाब २६/११ को बच गया वरना वो कौन सा वापस पाकिस्तान लौट के हनीमून मनाने वाला था ! फ़ांसी की सज़ा सही मायनों में न तो कसाब जैसे अपराधियों में दहशत ही बना पायेगी, न...
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AnbhigyA
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[15 May 2010 03:16 AM]



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