तितलियाँ : कुछ अश'आर संजीव 'सलिल'
तितलियाँ : कुछ अश'आर संजीव 'सलिल'तितलियाँ जां निसार कर देंगीं.हम चराग-ए-रौशनी तो बन जाएँ..*तितलियों की चाह में दौड़ो न तुम.फूल बन महको तो खुद आयेंगी ये..*तितलियों को देख भँवरे ने कहा. भटकतीं दर-दर न क्यों एक घर किया?कहा तितली ने मिले सब दिल...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[15 May 2010 03:22 AM]



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