इंसान सस्ता हो रहा है-क्षणिकायें

 हिन्द केसरी-पत्रिका महंगाई आसमान पर चढ़ गयी है, इसलिये नैतिकता तस्वीर में जड़ गयी है। चीजों की तरह इंसान भी बिकने लगा है, मांग आपूर्ति के नियम से अनुसार जरूरत से ज्यादा है बाज़ार में इसलिये मेहनत की कीमत पड़ रही है। ——— आधुनिकता के नाम पर इंसान सस्ता हो रहा... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

अभिव्यक्तिअनुभूतिदर्शनकाव्य

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[15 May 2010 01:31 AM]

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