समय परे ओछे बचन, सब के सहे रहीम
नमस्कार मित्रों! एक बार फिर शनिवार की चिट्ठा चर्चा के साथ हाज़िर हूँ। गर्मी बहुत बढ गई है। ऐसे गर्म माहौल में पहले तो सोचा कि आज छोड़ ही दूँ चर्चियाना। पर फिर याद आया कि एक दायित्व लिया है तो उसे निभाना चाहिए। तो अभी शाम के आठ बजे बैठा हूँ …...
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मनोज कुमार
मनोज कुमार
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[14 May 2010 20:25 PM]



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