कुनाल (सिफर)
आदाब,एक ताज़ा ग़ज़ल बहर-ए-मुजारी मुसम्मन अखरब मे आप सबकी नज़र कर रहा हूँ ... ये बहर के हर मिश्रे मे एक अनिवार्य रुकाव (//)होता है ... उम्मीद है आप अपनी आरा से नवाजेंगे..=========================बहर :- मुजारी मुसम्मन अखरब ( 221 2122 // 221 2122 (In...
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Kunaal
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[14 May 2010 20:09 PM]



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