चिट्ठेरिया !

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति उधर गली के आखिरी मोड़ पर नयन सुख चचा की दुकान पर सब लोग नयनों का सुख लेने की खातिर जमघट लगाए रहे । बस कोनों सुख हुआं से गुजरा नहीं कि लगे टकटकी बाँध के घूरने । जैसे कि घर तक पनार कर ही दम लेंगे । उधर नयन सुख चचा पान का पत्ता काटते हुए बोले "अरे ई ससुर... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
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[14 May 2010 18:18 PM]

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