कहो कटुआप्रेमी, आड़ में क्यों हो?[बकलमखुद-136]
…दोपहर बाद से अखबारों के दफ्तरों में संख्याओं का खेल शुरू हुआ। अयोध्या में मुल्ला मुलायम की चलाई गोलियों से कितने लोग मारे गए। मैंने खुद नहीं देखा, लेकिन बाद में कवि और संपादक वीरेन डंगवाल से उस दिन के किस्से सुने। … चंद्रभूषण हिन्दी के वरिष्ठ पत्रकार...
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अजित वडनेरकर
बकलमखुद
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[14 May 2010 16:44 PM]



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