ढिंढोरापीटू साफ़्टवेयर
प्राचीनकाल से ही ढिंढोरा पीटने की आवश्यकता पड़ती रही है. मुगलकाल में इसका उत्कर्ष हुआ. इसका अन्य नाम मुनादी है. पहले यह राजा-महराजाओं तक ही सीमित था, वे ही ढिंढोरा पिटवाते थे. यह तो सामान्य सी बात है कि यदि किसी को पिटवाया जायेगा तो कोई न कोई पिटेगा ही....
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M VERMA
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[14 May 2010 12:08 PM]



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