हर उम्र में भीगता सावन नहीं आता|.....
गुमशुदा मन का पता कोई नहीं पाता इस डगर से आजकल कोई नहीं आता| मुस्कुरा देती हूँ मैं कौन समझाए उन्हें हर उम्र में भीगता सावन नहीं आता| एक अनबोली व्यथा है आपकी बातों में, पर लाज का घूंघट उठाया भी नहीं जाता| नदी तो बहती रही और तट सूखे रहे काश ! कोई थाह का...
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Deepa Pant
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[14 May 2010 10:50 AM]



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