आज फिर उनको...

चिंतन मेरे मन का आज फिर उनको हमारा ख्याल आयासपने में आकर चुपके से मुझे जगाया कहने लगी भूल जाओ कल की कहानीचलो शुरु करे अब फिर एक नई कहानी अपना सहारा तुम्हें बनाना चाहती हूँतुम को अपना प्यार बनाना चाहती हूँ तुम ही तो हो मेरे श्रृंगार – दर्पणकरती हूँ मैं तुमको सब कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[14 May 2010 10:31 AM]

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