रचयिता सृष्टि की

गीत............... माँ के गर्भ में साँस लेते हुए मैं खुश हूँ बहुतमेरा आस्तित्व आ चुका है बस प्रादुर्भाव होना बाकी है। मैं माँ की कोख से ही इस दुनिया को देख पाती हूँ पर माँ - बाबा की बातें समझ नही पाती हूँ माँ मेरी सहमी रहती हैं और बाबा मेरे खामोशबस एक ही प्रश्न उठता है... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup

कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )

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[14 May 2010 09:10 AM]

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