रचयिता सृष्टि की
माँ के गर्भ में साँस लेते हुए मैं खुश हूँ बहुतमेरा आस्तित्व आ चुका है बस प्रादुर्भाव होना बाकी है। मैं माँ की कोख से ही इस दुनिया को देख पाती हूँ पर माँ - बाबा की बातें समझ नही पाती हूँ माँ मेरी सहमी रहती हैं और बाबा मेरे खामोशबस एक ही प्रश्न उठता है...
[पूरी पोस्ट]
sangeeta swarup
कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
24
6
0
6
25
[14 May 2010 09:10 AM]



Shuffle








