भूल गया हूँ, तब से खुदा को
रोको चाहे मुझको जीने सेमत रोको यारों पीने सेगम बढ़ता है जीने सेखलिश मिटती है पीने सेपीकर एक लम्हा जीना है अच्छाबिन पिए बरसों जीने सेकैसे रिंद हो जो डरते होनशीली नजरों से पीने सेकाफिर मुझको कहते हैं, लोगबंदगी मेरी, तेरे हाथों पीने सेभूल गया हूँ, तब से...
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डॉ. राजेश नीरव
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[14 May 2010 09:07 AM]



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