जलेबी का समाजवाद
मेरे जीवन में एक ऐसा वक्त आ गया हैजब खोने कोकुछ भी नहीं है मेरे पासदिन, दोस्ती, रवैयाराजनीतिगपशप, घासऔर स्त्री हालॉकि वह बैठी हुई हैमेरे पास... ( श्रीकांत वर्मा )...मैं भी कह सकता हूं यह बात । अव्वल तो कई चीजे कभी हासिल नहीं हुई। कुछ मिलने के बाद खो गईं...
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प्रभात रंजन
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[14 May 2010 08:01 AM]



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