भ्रष्टाचार-रिस रहा है मवाद

abhivyakti आस पास से शुरू करे तो सब कुछ खूबसूरत लगता है. रोटी और सुकून के लिए जद्दोजहद करते चेहरों के बीच यह कहना बेहद मुश्किल हैं की कौन भ्रष्ट है. एक एक चेहरे को परखने लगे तो सभी और सबके भीतर झांके तो कोई भी नही. फिर भी क्यों हमारी छवि भ्रष्ट होती जा रही है. क्या... [पूरी पोस्ट]
writer हिमानी
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[14 May 2010 08:13 AM]

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