मेरा होना और ना होना !

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति ऐसे समय में जबकिसत्ता के गलियारों में दबा दी जाती हैहर वो आवाज़जो सत्ता के विरुद्ध होमैं दूर तक फैली हुई खामोशी को देखता हूँ ।जबकि रोज़ हीमरते हैं या मार दिये जाते हैंनंगे, भूखे और बदरंग जानवर से आदमी मैं विकास की ओर अग्रसर भारत को देखता हूँ ।उन दिनों से... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :

समाज

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[14 May 2010 07:58 AM]

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