तीसरी क़िस्त- कौन चला बनवास रे जोगी

आज के ग़ज़लकार और ग़ज़ल. मुफ़लिस साहब के इस खूबसूरत शे’र -मीलों मृगतृष्णा के सायेकोसों फैली प्यास रे जोगीके साथ तीसरी क़िस्त हाज़िर है जिसमें जोगेश्वर गर्ग जी की ग़ज़ल भी का़बिले-गौ़र है।साथ ही दूसरी क़िस्त में चंद्र रेखा ढडवाल के इस खूबसूरत शे’र के लिए उनको बधाई देना चाहता हूँ।ताल... [पूरी पोस्ट]
writer सतपाल ख़याल
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[14 May 2010 07:43 AM]

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