ये दुनिया भी सर्कस जैसी........
मन की बातें, घर की बातें.जैसे हों नश्तर की बातें.नदिया के सपनों में आईं,रातों-दिन सागर की बातें.नाशवान क्योंकर करते हैं ?जीवन में नश्वर की बातें !ये दुनिया भी सर्कस जैसी,बातें भी जोकर की बातें.पैमाने भी बतलाते हैं,साक़ी की सागर की बातें.जीवन देती बदल...
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योगेन्द्र मौदगिल
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[14 May 2010 03:06 AM]



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