अंतिम गीत: लिए हाथ में हाथ चलेंगे.... ---संजीव 'सलिल'
. अंतिम गीतसंजीव 'सलिल' *ओ मेरी सर्वान्गिनी! मुझको याद वचन वह 'साथ रहेंगे'तुम जातीं क्यों आज अकेली?, लिए हाथ में हाथ चलेंगे....*दो अपूर्ण मिल पूर्ण हुए हम सुमन-सुरभि, दीपक-बाती बन. अपने अंतर्मन को खोकर क्यों रह जाऊँ मैं केवल तन? शिवा रहित शिव, शव...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
contemporary hindi poetry
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[14 May 2010 00:39 AM]



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