शब्दलेख सारथी
प्रीति ताहि सो कीजिये, जो आप समाना होयकबहुक जो अवगुन पडै+, गुन ही लहै समोयसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रीति उसी से करना चाहिए, जो अपने समान ही हृदय में प्रेम धारण करने वाले हों। यह प्रेम इस तरह का होना चाहिए कि समय-असमय किसी से भूल हो जाये तो उसे...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
धर्म
8
0
0
0
0
[13 May 2010 23:04 PM]



Shuffle







