भर्तृहरि नीति शतक-दूसरों का मुंह ताकने से कोई लाभ नहीं

दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यःप्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखाः।वीक्ष्यन्ते यन्मुखानि प्रस्भमपगतप्रश्रयाणां खलानांदुःखाप्तसवल्पवित्तस्मय पवनवशान्नर्तितभ्रुलतानि ।।हिंदी में भावार्थ- वन और पर्वतों पर क्या फल और अन्य... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

आध्यात्म

views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[13 May 2010 23:18 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix