कारवाँ संहार का

Unmanaa रो रही है सर पटक कर ज़िंदगी और बढता जा रहा है कारवाँ संहार का ! कंठ में भर स्वर प्रभाती का मधुरअलस कलिका संग कीलित नव उषा,खिलखिलाती आ गयी जब अवनितलदेख उसका लास यह बोली निशा,ह्रास मेरा दे रहा जीवन तुझे,क्रम यही है निर्दयी संसार का ! रो रही है सर पटक कर... [पूरी पोस्ट]
writer Sadhana Vaid
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
6
[13 May 2010 22:52 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix