शीशा और लोहा ------ चार मुक्तक ----- यशवन्त मेहता "यश"

युग क्रांति मुक्तक  १शीशे के सपने मत सजाओपल भर में चूर हो जायेंगेलोहे के सपने सजाओतूफानों में भी टूट न पाएंगेमुक्तक २मुकाम हासिल उन्हें ही होते हैंलोहे के सपने जो सजोते  हैंवो अपनी किस्मत पर रोते हैंशीशे के सपने जो सजोते हैंमुक्तक ३शीशे के घर में नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer यशवन्त मेहता "यश"

मेरे भीतर का शायर

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[13 May 2010 21:52 PM]

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