दोहा का रंग भोजपुरी के संग: संजीव वर्मा 'सलिल'
दोहा का रंग भोजपुरी के संग:संजीव वर्मा 'सलिल'सोना दहल अगनि में, जैसे होल सुवर्ण.भाव बिम्ब कल्पना छुअल, आखर भयल सुपर्ण..*सरस सरल जब-जब भयल, 'सलिल' भाव-अनुरक्ति.तब-तब पाठक गणकहल, इहै काव्य अभिव्यक्ति.. *पीर पिये अउ प्यार दे, इहै सृजन के रीत.अंतर से अंतर...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[13 May 2010 21:04 PM]



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