समीरलाल, अनूप शुक्ल और ज्ञानदत्त -कहीं आप जाने अनजाने में इनके सैनिक तो नहीं बन गए ? -सतीश सक्सेना
"अनूप भाई !
यह विवाद बेहद खेद जनक है निस्संदेह इससे आप दोनों की, हिंदी समाज की वाकई बेईज्ज़ती हुई है …
सवाल आप दोनों का कम और चर्चाकारों का अधिक है, मुझे लगता है कि कहीं न कहीं आप लोगों के प्रसंशकों ने दो अलग खेमें बना डाले हैं, और उन खेमों में आप लोगों...
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सतीश सक्सेना
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[13 May 2010 20:53 PM]



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