वरना, रहने दे लिखने को
रचनाकार : कुलवंत हैप्पी तुम्हें बिकना है,यहाँ टिकना है,तो दर्द से दिल लगा लेदर्द की ज्योत जगा लेलिख डाल दुनिया का दर्द, बढ़ा चढ़ाकररख दे हर हँसती आँख रुलाकरहर तमाशबीन, दर्द देखने को उतावला हैबात खुशी की करता तू, तू तो बावला हैमुकेश, शिव, राजकपूर हैं देन...
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Kulwant Happy
कुलवंत हैप्पी
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[13 May 2010 20:54 PM]



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