*** बूँद रक्त की, बाँकी है एक ***

Jayant Chaudhary मन में क्यों रखता है भय,होगी बस तेरी ही विजय,मन का छोटा सा संशय,बन बैठेगा तेरी पराजय..तू आज, हार को हरा दे,पराजय को पराजित कर दे,आज विधान को बदल दे,तू ख़ुद ही, लकीरें खींच दे...जो हाथ हैं, तो उनको उठा,औ कदम हैं, तो उनको बढ़ा,तुझे, बैठने से क्या मिला,तू... [पूरी पोस्ट]
writer Jayant Chaudhary
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[13 May 2010 15:30 PM]

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